Saturday, January 4, 2025

Unit I - Chapter 1.4 - योग के उद्देश्य

परिचय

योग जीवन जीने की कला और साधना के रूप में जाना जाता हैं। यह विज्ञान की तरह जीवन को आसान बनाता हैं। मानव जीवन में योग का महत्वपूर्ण स्थान हैं। इसकी साधना व सिद्धान्तो में ज्ञान का महत्व समझाया गया हैं। इसके द्वारा आध्यात्मिक और भौतिक विकास सम्भव हैं। वेदो और पुराणो में भी योग की चर्चा कई बार की गयी हैं। योग को प्राचीन काल से ही बहुत विशेष समझा गया हैं।

योग के उद्देश्य

आज के समय में हर व्यक्ति चाहता हैं कि वह प्रसन्न रहे और उसके जीवन में किसी भी प्रकार का दुःख न रहे इसके लिए मनुष्य को योग की विद्या समझनी होगी जिसके माध्यम से वह प्रत्येक कदम पर चिंता मुक्त और बिना तनाव के अपना जीवन जी सके और दिव्य शांति और मोक्ष को प्राप्त कर सके। योग का अंतिम उद्देश्य मोक्ष के साथ सामान्य जीवन के लिए योग के निम्नलिखित उद्देश्य भी हैं-

आध्यात्मिक उन्नति

योग का उद्देश्य व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति को बढ़ाना हैं। ज्ञानयोग, कर्मयोग, भक्तियोग, मंत्र योग, अष्टांग योग आदि हमें जीवन में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। अपने जीवन को निर्धारित लक्ष्य की ओर ले जाने के लिये योग सहायता करता हैं। इस संसार रूपी सागर में से मुक्त होने के लिए योग एक मात्र साधन हैं। योग के माध्यम से हम ईश्वर से जुड़कर अपनी आत्मा में परमात्मा को देख सकते हैं।

आत्मज्ञान की प्राप्ति

योग व्यक्ति को आत्मज्ञान प्रदान करता हैं। योग को जीवन के व्यवहार में लाने के बाद मै कौन हूँ? मेरा अपने प्रति, अपने परिवार के प्रति, समाज के प्रति, राष्ट्र के प्रति क्या कर्तव्य हैं। इन सब विचारों के प्रति व्यक्ति सजग हो जाता हैं। योग के बताये गये मार्ग के अनुसार अभ्यास करने पर व्यक्ति आत्मज्ञान प्राप्त कर सकता हैं और आत्म ज्ञान हो जाने पर वो मोक्ष की दिशा में कार्य करता हैं।

संस्कृति का प्रचार

योग का उद्देश्य हमारी संस्कृति का विश्व में प्रचार करना हैं। जिनमे योग के आदर्श एक भारतीय संस्कृति के रूप में विश्व को देन हैं। योग ने भारतीय संस्कृति के मूल्यों और आदर्शों को सारे विश्व में पहुँचाने का कार्य किया हैं। योग संस्कृति को भारत के ऋषि मुनियों ने ही सम्पूर्ण विश्व में स्थापित किया हैं। वर्तमान समय में योग प्रणाली के प्रचार एवं प्रसार से हम विश्व को शान्ति प्रदान कर रहे हैं।

मानवीय सम्बन्धों का विकास

योग का उद्देश्य हमारे मानवीय संबंधो को बेहतर करना हैं। सुखी और प्रसन्न जीवन प्रत्येक व्यक्ति की पहली प्राथमिकता होती हैं और योग के माध्यम से हम अच्छा व्यवहार, समर्पण भाव, आदर, नम्रता, सहयोग एवं सहनशिलता आदि गुणों का विकास स्वयं के अंदर कर सकते हैं। तथा दूसरों के साथ भी संबंधो को मजबूत कर सकते है यह सारे गुण अष्टांग योग के यम-नियम में हैं।

स्वास्थ्य के प्रति सजगता

योग का उद्देश्य हमारे स्वास्थ्य को बेहतर करना हैं। योग के द्वारा हम निरोग रह सकते हैं और अपने जीवन को बेहतर तरीके से बिना किसी बीमारी के आरोग्यता के साथ जी सकते हैं। स्वास्थ्य को बेहतर करने में योग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं। योग के द्वारा स्वास्थ्य लाभ उम्र भर प्राप्त होता रहता जिससे हम अधिक आयु तक अपना जीवन जी सकते हैं।

शारीरिक विकास

योग का उद्देश्य हमारा शारीरिक विकास भी करना हैं। योग हमारे शरीर के अंतर्गत आने वाले विभिन्न अवयवों के कार्य को बेहतर तरीके से करता हैं। योग हमारी मांसपेशियों की कार्यक्षमता, जोड़ों का लचीलापन, अंत: स्त्रावी ग्रंथी, मस्तिष्क, रक्त परिसंचरण आदि अवयवों के कार्य में मदद करता हैं। आसन, प्राणायाम, षट् कर्म, बन्ध, मुद्रा आदि योग के अंगों से शारीरिक विकास में मदद मिलती हैं।

मानसिक विकास

योग का उद्देश्य व्यक्ति के मानसिक विकास को बढ़ाना भी हैं। विवेक, चिंतन, एकाग्रता, निर्णय क्षमता, तर्क इत्यादि बातों का विकास योग के आसन, प्राणायाम, ध्यान आदि अंगों के माध्यम से ही संभव हैं। योग के माध्यम से व्यक्ति की मानसिक प्रणाली में सुधार होता हैं और उसकी निर्णय क्षमता बढ़ती हैं। लगातार प्राणायाम और ध्यान करने से उसके मस्तिष्क का विकास होता हैं।

जीवन शैली को बेहतर करना

योग का उद्देश्य व्यक्ति की जीवन शैली को बेहतर करना हैं। वर्तमान समय में गलत रहन-सहन, खानपान और तनाव से कई प्रकार की बीमारियाँ जैसे कब्ज, मोटापा, रक्तचाप, हृदयरोग, मधुमेह, दमा आदि मानव शरीर में देखी जा रही हैं। इन सभी बिमारियों को योगाभ्यास द्वारा काफी नियंत्रण लाया जा सकता हैं और बिगड़ी हुई जीवन शैली को फिर से ठीक किया जा सकता हैं।


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