परिचय
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में योग न सिर्फ तनाव और अन्य परेशानियों से राहत दिलाता हैं बल्कि पूरे दिन स्फूर्तिवान भी बनाए रखने में मददगार साबित होता हैं। योग करने से शरीर, मन और मस्तिष्क को पूरी तरह से स्वस्थ किया जा सकता हैं। लेकिन फिर भी योग को लेकर लोगों के बीच कई तरह की गलत धारणाएँ और भ्रांतियां फैली हुई हैं। जिसके कारण लोग योग नहीं करते हैं।
योग के लिए शरीर लचीला चाहिएयोग करने के लिए शरीर को लचीला होना चाहिए यह एक तरह की गलत धारणा हैं जो बिलकुल भी सही नहीं हैं। योग लगातार या नियमित रूप से करते रहने से शरीर अपने आप ही लचीला होता जाता हैं और धीरे धीरे शरीर कई कठिन आसनों को भी करने के लिए तैयार हो जाता हैं। जो कि पहले करने में कठिनाई का अनुभव कर पा रहे थे या फिर उन आसनों को नहीं कर सकते थे।
स्वस्थ व्यक्ति को आवश्यकता नहीं
यह भी एक गलत धारणा हैं कि स्वस्थ व्यक्ति को योग करने की आवश्यकता नहीं हैं। परन्तु देखा जाए तो स्वस्थ व्यक्ति को अधिक उम्र तक स्वस्थ बने रहने के लिए योग की अधिक जरूरत होती हैं। योग करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता हैं। जो कि हमें आने वाली बीमारियों से बचा कर रखता हैं। और हम हमेशा ही स्वस्थ बने रहते हैं।
योग करना अत्यधिक महँगा
योग करना काफी महँगा हैं तथा योग सिखाने वाली जगहों पर योग की फीस काफी अधिक होती हैं। यह धारणा भी गलत हैं क्योंकि आज कई जगहों पर योग केंद्र शासन द्वारा संचालित किए जाते हैं जो की बिल्कुल निःशुल्क उपलब्ध हैं या बहुत ही न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध हैं। जहां पर जाकर किसी कुशल मार्गदर्शन में योग सीखा जा सकता हैं। और ठीक प्रकार से सीख जाने के बाद स्वयं भी कर सकते हैं।
योग केवल धर्म विशेष के लिए
योग को धर्म से भी जोड़ा जाता हैं। कुछ लोग योग को एक विशेष समुदाय और धर्म से जोड़कर देखते हैं। लेकिन इस बात में बिलकुल भी सच्चाई नहीं हैं। किसी भी धर्म का व्यक्ति एक स्वस्थ शरीर और मन को प्राप्त करना चाहता है । इसलिए किसी भी धर्म/संप्रदाय के लोग योग को कर सकते हैं। क्योंकि योग सार्वभौमिक हैं और उसका उद्देश्य केवल मोक्ष प्राप्त कराना हैं जो जीवन का अंतिम लक्ष्य हैं।
योग व्यायाम से बेहतर नहीं
कुछ लोगों को यह भ्रांति हैं कि योग एक्सरसाइज से अच्छा नहीं हैं परंतु यह धारणा भी सही नहीं हैं। क्योंकि योग के माध्यम से केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त होते हैं। जो कि केवल व्यायाम से नहीं मिलते हैं। इसलिए योग व्यायाम से कहीं अधिक लाभ देता हैं। अगर कोई व्यक्ति केवल कुछ समय के लिए भी योग करता है तो यह जीवन के लिए बहुत अच्छा हैं।
योग वृद्धों और महिलाओं के लिए
यह धारणा भी गलत है कि योग केवल वृद्धों और महिलाओं के लिए ही हैं। वास्तव मे योग प्रत्येक उम्र के लोगों को लाभ प्रदान करता हैं चाहे वे बच्चे, युवा, बुजुर्ग या महिला ही क्यों न हो। क्योंकि योग का उम्र से कोई संबंध नहीं हैं। इसलिए इसे किसी भी उम्र में एक बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए किया जा सकता हैं। बल्कि बच्चों और युवाओं के लिए तो योग अत्यधिक फायदेमंद हैं।
योग से समय की बर्बादी
योग करने से समय नष्ट होता है यह सोचकर भी कुछ लोग योग नहीं करते हैं। परन्तु यदि प्रतिदिन 30-45 मिनट भी सुबह तथा शाम के समय योग कर लिया जाए तो यह शरीर व मन के लिए अत्यधिक लाभप्रद होगा। यदि हमारा शरीर ही स्वस्थ नही होगा तो हम अपने दैनिक कार्यो को ठीक प्रकार से नहीं कर पाएगें और हमें अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में परेशानियों का अनुभव करना होगा।
योग केवल दुबले-पतले के लिए
एक गलत धारणा यह भी हैं कि सिर्फ पतले और स्वस्थ लोगों को ही योग करना चाहिए। परन्तु ऐसे लोग जो मोटे हैं या जिनकी दिनचर्या ठीक न होने के कारण आलसी स्वभाव के हो गए हैं उन्हें तो अपनी स्वस्थ जीवन शैली के लिए अवश्य रूप से ही योग को अपनाना चाहिए ताकि वे भी पूरी तरह स्वस्थ रहे और अन्य लोगों की तरह प्रसन्नता का अनुभव करते हुए तनाव मुक्त जीवन जी सके।
योग में विविधताएं कम
यह भी एक तरह की गलत धारणा हैं कि योग में कुछ ही आसन हैं जबकि योग में एक-दो नहीं सैकड़ों आसन हैं। योग ग्रन्थों के अनुसार आसनों की संख्या 84 लाख बताई गई हैं। आज कई प्रकार के योग अभ्यास किए जाते हैं। जिनमे व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता हैं। इसलिए जिन्हें लगता हैं कि योग में कुछ ही आसन होगे उन्हें योग को अपनाकर देखना चाहिए।
बीमार व्यक्ति को आवश्यकता नहीं
बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को योग की आवश्यकता नहीं होती हैं यह भी एक गलत धारणा हैं। कुछ विशेष आसनों को छोड़कर अन्य आसन योग प्रशिक्षक से परामर्श लेकर कर सकते हैं। इससे उन्हें न केवल दर्द में आराम मिलेगा बल्कि योग थैरेपी के माध्यम से बीमारी को जल्द ठीक करने में मदद भी मिलेगी। योग एक उत्तम तरीका जो बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को जल्द ठीक करता हैं।
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