Monday, January 6, 2025

Unit I - Chapter 2.1- योग की उत्पत्ति

प्रस्तावना 

योग की उत्पत्ति मानव सभ्यता के पहले से अनादि काल से समझी जाती हैं। वर्तमान योग की उत्पत्ति आज से लगभग 5000 वर्ष पहले की समझी जाती हैं। जो कि सिंधू घाटी की सभ्यता और संस्कृति से मिलता हैं। जहां पर देवी देवताओं की मूर्तीयाँ विभिन्न आसनों की स्थितियों में पायी गयी। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता हैं कि योग की उत्पत्ति हजारों वर्ष पूर्व भारत देश में हुई थी।

प्रथम संकल्पना

योग भारतीय संस्कृति का अति प्राचीन शास्त्र हैं। योग के उद्गम के प्रति भिन्न-भिन्न मत हैं। जैसे कहा जाता हैं कि भारतीय संस्कृति का आधारभूत सिंधू घाटी सभ्यता और संस्कृति को समझा जाता हैं। हड़प्पा और मोहजोदड़ो के खुदाई में कुछ अवशेष मिले जिन पर योगासनों के चित्र अंकित थे। इससे अनुमान लगाया जाता हैं कि वैदिक काल के पूर्व से ही योग साधना का प्रचलन था।

द्वितीय संकल्पना 

यह संकल्पना भगवद्गीता से सम्बधित हैं। गीता के चतुर्थ अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि योग का उपदेश सृष्टि के आरंभ मे मैने सूर्य को दिया सूर्य ने अपने पुत्र मनु को यह योग सिखाया और मनु ने उसके पुत्र राजा इक्ष्वाकु को बताया और फिर अन्य राजाओं ने उसे अपनाया अन्त में वह योग विलुप्त हो गया। उसी को मै आज तुम्हारे सामने पुनः प्रगट कर रहा हूँ।

तृतीय संकल्पना 

इस संकल्पना के अनुसार ब्रह्म देव ने सृष्टि के निर्माण करने हेतू सर्व प्रथम हिरण्यगर्भ को उत्पन्न किया था हिरण्यगर्भ को अनेक विद्याओं एवं कलाओं का आद्य प्रवर्तक माना जाता हैं। बृहद् योगियाज्ञवल्क्य स्मृति में हिरण्यगर्भ को योग का उत्पत्तिकर्ता भी कहा गया हैं।
हिरण्यगर्भा योगस्य वक्ता नान्यः पुरातनः। हिरण्यगर्भ से पुराना योग का आदि वक्ता कोई नहीं हैं।

चतुर्थ संकल्पना 

इस संकल्पना के अनुसार ऐसा माना जाता हैं कि जिन्होंने अपने मस्तक पर पृथ्वी को आधार दिया हैं। उस शेषनाग को योग के आरंभकर्ता के रूप में माना गया हैं। महर्षि पतंजलि को उन्ही शेषनाग के अवतार के रूप में जाना जाता हैं। महर्षि पतंजलि ने मानव समाज के उत्थान के लिए अष्टांग योग की रचना की जिससे मानव का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास हुआ।

पांचवी संकल्पना 

इस संकल्पना के अनुसार भगवान शिव को प्रथम योगी या आदि योगी भी कहा जाता हैं। ऐसा माना जाता हैं कि कांति सरोवर झील के किनारे पर ही योग की उत्पत्ति भगवान शिव और पार्वती के संवाद से हुई हैं। भगवान शिव ने ही सर्वप्रथम योग का ज्ञान माता पार्वती को दिया और माता पार्वती जी के द्वारा यह योग का ज्ञान सप्त ऋषियों को दिया गया और इस तरह आगे जाकर योग का विस्तार पूरी दुनिया में होता गया।

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